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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

समय

समय ही भ्रम है बनाता समय ही भ्रम तोड़ता
समय का है खेल सृष्टि , कौन कर्ता, भोक्ता ?

3 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. ध्यान से समझें तो समय का संधि विच्छेद है सा धन मय अर्थात नशे का साथ .. सब किसी न किसी नशे के साथ क्रियाशील रहते हैं नशा उतारते ही जीवन में शून्य आ जाता है ..

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  2. निर्माण उत्थान पतन वही होता है
    जहां समय होता है
    समय के तीन रूप हैं,
    निरंतर परिवर्तनशील समय से जुडना ही
    जीवन लोक
    समय से बिछड जाना मृत्यु लोक
    इससे ज्यादा मैं समय के बारे में नहीं जानता
    आप जैसे महान कवि ही रहस्य खोल सकते हैं
    मेरी स्थिती ऐसी है जैसे उंट पहाड के निचे

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