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गुरुवार, 13 जून 2013

कृष्ण 



जिसके मात्र स्मरण से ही हर संताप बिसर जाता है वह तो केवल एक कृष्ण हैं !
जिसकी स्वप्न झलक पाते ही हर आकर्षण बिखर जाता है जो सबके दुःख का साथी है सबका पालकजनकसंहर्ता वह तो केवल एक कृष्ण हैं .
साक्षी सबके पाप पुण्य का ,न्यायमूर्ति सृष्टि का भरता ,वह अवतार प्रेम का मधु का ,अनघ,शोक मोह का हरता वह तो केवल एक कृष्ण हैं

5-4-09







 
 


 
शोक निवारक योग

योगेश्वर ने है दिया शोक निवारक योग ,
सृष्टि के है मूल में आधेयआधार .
प्रकृति के पीछे पुरुष,पुरुष -प्रकृति आधार ,
फल आधारित पुष्प पर,पल्लव पुष्प आधार .
पल्लव आश्रित शाख परतना शाख आधार,
मूल आधार स्कंध की बीज वृक्ष आधार .
बीज आधारित भूमि पर,भूमि परिक्रमा बाध्य ,
करती पथ पर ही गमन ,सूर्य देव आराध्य .
ढूध-धवलता  पृथक अग्नि से ताप ,
जल -रस,प्रकृति -गंधमयवायु सहित है भाप,
राधा -माधव एक हैं एक तत्व दो नाम ,
 शासक  शासिताप्रेम बहे निष्काम .
आत्मा शाश्वत तत्व है ,रूप व्यक्त आधार
 नारी - नर दो बिम्ब हैं दोनों सृजन आधार .

२०.०६.२०१०


 

1 टिप्पणी:

  1. मनीषा जी बहुत सुदंर बहुत गहरी है आपके सभी प्रत्सुति में.... क्या बात है.. गर्व है हुमी आपजैसेी कवि लेखिका से जुड़ कर.. शुक्रिया तहे दिल से आभार आपका...

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