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बुधवार, 29 मार्च 2017

मैं सगर्भा

मैं सगर्भा, सार्गर्भा , ब्रह्म का विस्तार,
जीव की हूँ वासना तो विज्ञ का संसार ।

शक्ति का अवतार हूँ अस्तित्व का आधार 
धारिणी समभाव  की कर्षण करूँ अहंकार 

कामिनी हूँ 'काम' की हूँ जन्मति भी राम 
पुण्य रूपा   पापिनी  हूँ पुरुष का आयाम,

अग्नि-सी हूँ दाहका     पर देती हूँ विश्राम 
शव बना सकती हूँ 'शिव',माधुर्यमय घनश्याम 


रचनाकाल : 25 फ़रवरी 2009


adha akash hamara

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