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बुधवार, 29 मार्च 2017

केवल कृष्ण

जिसके मात्र स्मरण से ही हर संताप बिसर जाता है 
वह तो केवल एक कृष्ण हैं !

जिसकी स्वप्न झलक पाते ही 
हर आकर्षण बिखर जाता है 
जो सबके दुःख का साथी है 
सबका पालक, जनक, संहर्ता 
वह तो केवल एक कृष्ण हैं !

साक्षी सबके पाप पुण्य का,
न्यायमूर्ति सृष्टि का भरता,
वह अवतार प्रेम का मधु का,
अनघ, शोक मोह का हरता 
वह तो केवल एक कृष्ण हैं !

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (30-03-2017) को

    "स्वागत नवसम्वत्सर" (चर्चा अंक-2611)

    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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