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गुरुवार, 25 जुलाई 2013

गीता गीत


तिमिर -तिमिर ,घन तिमिर तिमिर्मय
जग -जीवन -मन -प्राण तिमिर्मय ,
विस्मृत सत पथ ,विस्मृत सद पथ ,
विस्मृतिमय संसार तिमिर्मय !
ज्योत प्रज्ज्वलित गीता रूपी
गीता से संसार ज्योतिर्मय !
नीरस रजनी ,नीरस संध्या
विवश उषा है विकल है दिवा
है अशांत -आक्रांत -मलिन मन
जीवन का परिधान मलिन मय
रस सरिता है निर्मल करणि ,
गीत ही  है शाश्वत तरणि !
1985

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