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बुधवार, 31 जुलाई 2013

चन्द्रिका का पाश



चन्द्रिका के पाश में
क्यूँ डस लिया जाता ?
पुरुरवा बोलो -
तुम्हारा तेजमय मस्तक ,
तुम्हारा ओज माय जीवन
तुम्हारे शब्द का जादू
तुम्हारा योगमय साधन
सभी कुछ शून्य हो जाता
चन्द्रिका के पाश में क्यूँ
डस लिया जाता ?
तुम्हारा उद्यमी जीवन
बहुत निरुपाय हो जाता
तुम्हारा नीरव अंतर्मन
कोलाहलमय हो जाता
सभी कुछ भूलता जाता ..
चन्द्रिका के पाश में
क्यूँ  डस  लिया जाता ?
तुम उर्वशी के नहीं
आधुनिक पुरुरवा हो
दिनकर के नहीं
संघर्षमय युवा हो
न जाने कितने प्यासे हो
लहर में बहते जाते हो ..
तुम्हारी शक्ति भी तुम हो
तुम्हारी तृप्ति भी तुम हो
न खोजो उसको बाहर तुम
जिससे पूर्ण तुम खुद हो
अधूरी है असफलता
सफलता पूर्ण होती है
सफलता के उपासक हो
तो स्वयम में पूर्ण तुम फिर हो
1982

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