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मंगलवार, 16 जुलाई 2013

कल्पना लोक,

कल्पना लोक,ओस का कण ,
भविष्य जैसे उगता सूरज ,
ओस से ढकी मखमली घास ,
उनींदी आँखों का स्वप्नोल्लास !
Photo
सितारों भरी घनी यह रात,
मदिर भीगा  जैसे आँचल ,
झुटपुटे का हल्का आभास ,
किसी का हो धूमिल सा गात,
Photo: Good night world ♥
बर्फ की चट्टानों सा श्वेत ,
अतीत का कड़वा शिलालेख,
कंटीली पग डंडी की राह 
ज़िंदगी जी लेने की चाह!
क्षीर पर छाया रजत प्रवाह ,
रुपहले स्वप्नों का निर्वाह ,
अगम्य ,अम्लान सिन्धु सा 
एक बिंदु का सजल उच्छाह !
Photo
शिथिल बालू सी उत्कंठा 
चन्द्र -रवि आवेगों के साथ 
उमड़ती -पड़ती हो दिन रात 
ज्वार -भाटे  सा हर उन्माद !
1980

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